सफलता का एक पुल

ग्राम पंचायत के पडयाफला के लोगों को बारिश मे बहुत मुसीबतों का सामना करना पड़ता था, साथ मे मेरियाखेडी, जोरामहुडा, जाखली के लोगों को भी आवागमन मे परेशानी होती थी. मुख्य रूप से पडयाफला के 700 लोगों की बस्ती को बहुत परेशानी होती थी. ये लोग बीमार होने पर भी कई बार अस्पताल नही जा पाते थे और अपनी बीमारी गंभीर हो जाती थी. प्रसव जैसे समय आवागमन न होने के कारण महिला की मौत तक हो जाती थी. लोग बहुत आवश्यक होने पर भी ना तो प्रतापगढ जा पाते थे और ना ही ग्राम ढिकनिया. यह समस्या बारिश के समय तो थी ही लेकिन बारिश के बावजूद भी खरीफ की फसल के समय लोग अपनी फसल को प्रतापगढ मॅंडी मे नही ले जा पाते थे क्योंकि उस समय भी यन्हा कीचड़ के कारण रास्ता जाम हो जाता था. वे लोग कीचड सूखने के बाद अपनी फसल को मॅंडी ले जाते थे जबकि उनको पैसों की तुरंत आवश्यकता होती थी क्योंकि उन्हे अगली फसल के लिए बीज वा खाद का भी इंतज़ाम करना पड़ता था. समस्या थी वरदा नदी पर एक पुल की कमी जो की पडयाफला और ढिकनिया के बीच से निकलती है. इसपर पुल ना होने से पडयाफला के लोग ढिकनिया– हनुमान चौराहा रोड तक नही पहुँच पाते थे. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए ग्राम पंचायत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया और इस नदी पर पुल बाँधने की शुरुआत सन 2007 मे की और इस साल ये पूरा हो गया.

पुल कुल 70 मीटर लंबा है और इसकी लागत 500000 रुपये आए जो पंचायत ने टाडा (ट्राइबल एरिया डेवेलपमेंटे एक्ट) के फंड से करवाया. जिस जगह यह पुल बना है उसे “नदी ढाला का पुलकहते हैं. इस कार्य के बदोलत पडयाफला के लोग चौमासे की दिक्कतों और खरीफ के समय आने वाली दिक्कतों से दूर हो पाए. ये कार्य गाँव वालों की नज़र मे बेशक़ीमती है.

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